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× सप्तम कार्यसमिति एवं तृतीय कार्यकारणी की बैठक रविवार, ता 22 सप्टेंबर 19 को बेंगलोर में
(07-09-2019)

जय महेश 

आपको सूचित किया जाता है कि, कर्नाटक गोआ प्रदेश माहेश्वरी सभा के दशम सत्र की सप्तम कार्यसमिति एवं तृतीय कार्यकारणी की बैठक का आयोजन रविवार,ता 22सप्टेंबर 19 को सुबह 10.00 बजे से माहेश्वरी सभा, बेंगलोर के आतिथ्यमे माहेश्वरी भवन,ओखलीपुराम, बेंगलोर  में किया गया है। आपकी उपस्थिती प्रार्थनीय है।

धन्यवाद। 

रमेश बाहेती - प्रदेश मंत्री

PLEASE INFORM YOUR ARRIVAL DETAILS TO

1. SHRI DEVAKINANDAN DAGA - 9844039442,

2. SHRI NAVALKISHOR MALU - 9880133777

3. SHRI AJAY RATHI-9845092566

4. SHRI BHAGWANDAS LAHOTI - 9845500200

विवाह संबंधित निमंत्रण, मनुहार एवं कार्यक्रम की जानकारी "बल्क SMS, Recorded Voice Call एवं WhatsAPP" माध्यम से भेजने हेतु कॉल करे.. SMS JOCKEY 9175399947 ....एक कदम "डिजिटल भारत" की ओर.

कर्नाटक गोवा प्रदेश माहेश्वरी सभा

क्र.०५  दि.११-०७-२०१८

मान्यवर महोदय,

आपको सूचित करनेमे हर्ष हो रहा है कि प्रदेश सभा के दशम सत्र की चतुर्थ कार्यसमिति बैठक रविवार,दिनांक अगस्त २०१८ को माहेश्वरी भवन, विजयपुर में सुबह ११ बजेसे आयोजित की गयी है। इस बैठक में आप सादर आमंत्रित है तथा आपकी उपस्थिति प्राथनीय है।

ठिक ११ बजे श्री भगवान महेश के पूजन तथा महेश वंदना के उपरान्त दिवंगत आत्माओंको श्रन्दाजली अध्यक्ष के उद्दबोधन के बाद बैठक की कार्यवाही प्रारंभ होगी।

विचारार्थ विषय

गत बैठकका का अहवाल प्रस्तुत करना एवं स्विकृत करना,

दशम सत्र का २०१७-१८ का हिसाब किताब स्वीकृत करना,

प्रदेश सभा के विभिन्न सह समितियोंकी प्रगती अहवाल,

अखिल भारतवर्षीय माहेश्वरी महासभा द्वारा पारित प्रदेश सभा/जिला सभा/ग्राम सभा के लिये संशोधित विधान को पारित कराने के लिये चर्चा,

अखिल भारतवर्षीय माहेश्वरी महासभा द्वारा - जनवरी २०१९ को आयोजित अंतरराष्ट्रीय महाधिवेशन के बारे में जानकारी तथा समिति का गठन करना,

आर्थिक सामाजिक सर्वेक्षण प्रपत्र के कार्य की प्रगती रिपोर्ट,

माहेश्वरी पत्रिका के सदस्यता बनाने की प्रगती रिपोर्ट,

प्रदेश सभा की नई वेबसाइट एवं मोबाइल ऐप्प के बारेमे जानकारी,

प्रदेश सभा ट्रस्ट के कार्यवृतान्त,

१० महिला संगठन युवा संगठन का कार्यवृतान्त,

११ जिला सभाओंका कार्यवृतान्त,

१२ दशम सत्र की अगली कार्यसमिति/कार्यकारिणी बैठक के लिये स्थान तारिख तय करना,

१३ अन्य विषय अध्यक्षजी की अनुमतिसे,

१४ धन्यवाद प्रस्ताव।

 

धन्यवाद प्रदेश मंत्री

रमेश बाहेती




जय महेश्वराय नमः

कर्नाटक गोवा प्रदेश माहेश्वरी सभा में आपका स्वागत..

सन्मान्य मान्यवर महोदय,

सेवा में सादर जय महेश,

बहुत ही हर्ष एवं सम्मान की बात है कि संपूर्ण कर्नाटक मे हर्षोल्लास के साथ हमारी वंशोत्पत्ति महेश नवमी के पावन पर्व का आयोजन विशेष रूप से बहुत ही उत्साह उमंग एवं धूम धाम से संपन्न हुआ।हर जगह

कर्नाटक प्रदेश में प्रदेश माहेश्वरी सभा का विधिवत गठन दांडेली अधिवेशन सन् 1981 में हुआ।इस प्रथम सत्र के प्रदेश अध्यक्ष श्रीमान बंसिलालजी रान्दड बेंगलोर निवासी थे। द्वितीय सत्र 1984-1988 के लिये पुनः श्री बंसिलालजी रांन्दड को प्रदेश अध्यक्ष पद के लिये सर्वानुमतिसे सुशोभित किया गया।इस सत्रमे रांन्दडजीने समाजमे चली आ रही कुरितियोको बंद करनेके लिये प्रचार माध्यम द्वारा उल्लेखनीय कार्य किया।

इसके पश्च्यात दि.16 दिसम्बर 1990 को गुलबर्गा में श्रीमान लष्मिनिवास तापड़िया के अधक प्रयासोसे कर्नाटका प्रांतीय अधिवेशन का आयोजन किया गया। इस अधिवेशन में तृतीय सत्र 1988-1993 के लिये प्रदेशअध्यक्ष का कार्यभार गुलबर्गा के श्रीमान् शंकरलालजी गिल्डा को सौपा गया।

The purpose of this site is to bring all Maheshwaris together by providing a medium that facilitates friendship and networking, understanding and discussion of common issues, awareness of current events and sharing of ideas. Active participation from all the Maheshwaris is thus encouraged and appreciated in achieving this goal.

To bring all the Maheshwari living in the Karnataka - Goa (South India) together, to share, discuss and understand the values of the ‘Maheshwari way of life’, and to concern itself with the social welfare of the members of the Maheshwari community.

विक्रम सम्बत -मिती सेवा शुल्क - खंडेला नगर में सूर्यवंशी रजाओं में चौहान जाती के राजा खड्गलसेण राज्य करते थे | एक समय राजा ने भू-देव जगतगुरु ब्राह्मणों को बड़े आदर पुर्वक अपने मन्दिर में भोजन कराकर उन्हें द्रव्य आदि अर्पण किये तब ब्राह्मणों ने कहा- हे राजन ! तेरा मन वांछित वरदान सिद्ध हो जाय, तब राजन बोला - हे महाराज मुझे पुत्र की वांछना है - तब ब्राह्मणों ने कहा -हे राजन - तू शिव- शक्ति की सेवा कर, तेरे चक्रवर्ती पुत्र बड़ा बलशाली और बुद्धिमान होगा लेकिन उसे सोलह साल तक उत्तर दिशा में मत जाने देना और न ही सूर्यकुंड में स्नान करने देना तथा न ही ब्राह्मणों से द्वेष करने देना | अन्यथा इसी देह से उसका पुर्नजन्म हो जायेगा| राजा ने वचन दिया की ब्रह्मण देवताओं में ऐसा नहीं करने दूंगा | तब ब्राह्मणों ने आशीर्वाद दिया , और रजा ने ब्राह्मणों को दान दक्षिण देकर विदा किया | ब्राह्मन अपने -अपने स्थानों पर चले गये |




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